कुलाष्टक पाठ: विधि, लाभ और महिमा | Kulashtak Path Vidhi, Benefits & Importance

Sanaatan Gyaan
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🌸 कुलाष्टक पाठ: महिमा, विधि और लाभ 🌸

"कुलाष्टक" एक अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य स्तोत्र है, जो कुलदेवी की स्तुति एवं आराधना के लिए गाया जाता है। कुलदेवी को परिवार की संरक्षक शक्ति माना जाता है, जो वंश की रक्षा, समृद्धि और मंगल का आशीर्वाद देती हैं।
कुलाष्टक का नित्य पाठ व्यक्ति एवं उसके वंश को आध्यात्मिक तथा सांसारिक उन्नति प्रदान करता है।


कुलाष्टक पाठ करने के लाभ ✨

🔸 कुल की रक्षा: कुल (परिवार) में आने वाली विघ्न-बाधाएँ दूर होती हैं।
🔸 वंश वृद्धि: संतान सुख एवं वंश परंपरा का विस्तार होता है।
🔸 धन और ऐश्वर्य: आर्थिक उन्नति, राज्य-संपत्ति, और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।
🔸 सकल संकट नाश: दुर्भाग्य, बीमारियाँ और बुरी शक्तियाँ दूर होती हैं।
🔸 मंगल कार्य सिद्धि: विवाह, शिक्षा, रोजगार आदि कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
🔸 आध्यात्मिक उन्नति: आत्मबल, श्रद्धा, भक्ति और मोक्षमार्ग की प्राप्ति होती है।


कुलाष्टक पाठ की विधि 📜

  1. शुद्धि:

    • प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।

    • मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का संकल्प लें।

  2. स्थान चयन:

    • घर के पूजन स्थल पर या कुलदेवी के मंदिर में बैठें।

    • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।

  3. दीप प्रज्ज्वलन:

    • घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाएँ।

    • धूप-दीप और पुष्प अर्पित करें।

  4. संकल्प:

    • कुलदेवी से श्रद्धा पूर्वक प्रार्थना करें कि आप अपने कुल की रक्षा हेतु कुलाष्टक पाठ कर रहे हैं।

  5. कुलदेवी का आवाहन:

    • "ॐ श्री कुलदेव्यै नमः" मंत्र का 11 बार जप करें।

    • फिर कुलाष्टक का श्रद्धा एवं स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें।

  6. पाठ समाप्ति पर:

    • आरती करें और प्रसाद चढ़ाएँ।

    • परिवार के सभी सदस्यों के लिए आशीर्वाद की प्रार्थना करें।

  7. विशेष सुझाव:

    • पाठ प्रतिदिन करना श्रेष्ठ है, किन्तु यदि संभव न हो तो नवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा या कुल विशेष तिथियों पर अवश्य करें।

    • व्रतपूर्वक (उपवास या सात्त्विक आहार लेकर) पाठ करने से फल कई गुना बढ़ता है।


कुलाष्टक पाठ करने का शुभ समय 🕉️

🔹 प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त 4:00–6:00 AM) सबसे उत्तम माना गया है।
🔹 विशेष पर्वों पर (जैसे नवरात्रि, दीपावली, कुल पूजा दिवस) इसका पाठ अति शुभकारी है।


कुलाष्टक पाठ के समय ध्यान रखने योग्य बातें 🚩

  • पाठ करते समय मन को एकाग्र रखें।

  • मोबाइल, टीवी, आदि विघ्नों से बचें।

  • कुल देवी का आह्वान प्रेम और श्रद्धा से करें।

  • पाठ के बाद अपनी कुल देवी को नमस्कार कर आशीर्वाद प्राप्त करें।


समापन 🌸

कुलाष्टक पाठ न केवल वंश रक्षा का माध्यम है, बल्कि यह साधक के जीवन को समृद्धि, प्रेम और आशीर्वाद से परिपूर्ण कर देता है।
नियमित कुलाष्टक पाठ करने से कुल देवी की कृपा सदा बनी रहती है और जीवन में हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग खुलता है।

॥ जय माँ कुलदेवी ॥

कुलाष्टक पाठ विधि, लाभ और महिमा  Kulashtak Path Vidhi, Benefits & Importance


ॐ नमस्ते श्री शिवाय कुलाराध्या कुलेश्वरी।

कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1

 बन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।

वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।2

आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।

विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।।3

त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी।

भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।4

महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी।

कुलवृद्धि करी माता त्राहिमाम् शरणागतम्।।5

चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी।

प्रकटीतां सुरेशानी वन्दे त्वां "कुल गौरवाम्"।।6

त्वदीये कुले जात: त्वामेव शरणम गत:!

त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना।।7

पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे|

सर्वदास्माकं कुले भूयात मंगलानु शाशनम ।।8

कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं य: सुकृति पठेत।

तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।9

कुलदेवी स्त्रोत्मिदम, सूपुण्यं ललितं तथा |

अर्पयामी भवत भक्त्या, त्राहिमां शिव गेहिनी ||10

| श्री कुलदेव्यार्पणम अस्तु |

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