केतु ग्रह का प्रभाव, दोष और उपाय | Ketu Graha in Astrology – Effects, Remedies & Stotram

Sanaatan Gyaan
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🔯 केतु ग्रह: प्रभाव, दोष और उपाय

केतु एक छाया ग्रह है, जो मोक्ष, आत्मज्ञान, रहस्य और अंतर्ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। यह जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन और गूढ़ अनुभवों का कारक होता है। जब यह शुभ होता है, तो व्यक्ति को महान आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त होती है।

केतु ग्रह का प्रभाव, दोष और उपाय | Ketu Graha in Astrology – Effects, Remedies & Stotram


📌 शुभ प्रभाव:

  • तीव्र अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति।
  • ज्योतिष, तंत्र, मंत्र और विज्ञान में रुचि।
  • त्याग, वैराग्य और आत्मज्ञान की प्राप्ति।

⚠️ अशुभ प्रभाव (केतु दोष):

  • अनजाना भय, भ्रम, मानसिक विक्षोभ।
  • शारीरिक रोग, विशेषतः त्वचा और नस संबंधी।
  • आकस्मिक दुर्घटनाएं और राह से भटकाव।

🔧 उपाय:

  • केतु के लिए गाय की सेवा करें, और तिल दान करें।
  • काले और नीले रंग की चीज़ें दान करें।
  • गणेश जी और भैरव की पूजा करें।
  • “ॐ कें केतवे नमः” का 108 बार जाप करें।

🕉️ छोटा केतु स्तोत्र:

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥

📜 विस्तृत केतु कवच (Ketu Kavach):

ॐ श्री केतु कवचम् ॥

केतुः शिरो मे पातु, ललाटं च शुभप्रदः।
नेत्रे पातु महासिंहः, श्रवणे च महातपः॥

घ्राणं मे पातु चोग्रश्च, वदनं सुरपूजितः।
जिव्हां पातु जगद्वन्द्यः, कण्ठं मे च महाबलः॥

भुजौ मे पातु सर्वज्ञः, हृदयं पातु चोर्जितः।
जठरं मे पातु शान्तात्मा, नाभिं मे च जगद्गुरुः॥

कटिं मे च वरारोहः, ऊरू मे च महासुरः।
जानुनी च रजःपाहि, जंघे मे च सुरार्चितः॥

पादौ पातु ग्रहाधीशः, सर्वाङ्गं मे सदा रक्षेत्।
केतुर्नित्यं शुभप्रदः ॥

इति केतु कवचं पुण्यं, सर्वरोग निवारणम्।
सर्वदोषप्रशमनं, सर्वसम्पत्करं शुभम्॥

पठित्वा पाठयित्वा च त्रिसंध्यं श्रद्धयान्वितः।
केतोः पीडा विनश्येत्, भुक्तिः मुक्तिश्च लभ्यते॥

॥ इति श्री केतु कवचं सम्पूर्णम् ॥

नोट: केतु ग्रह जीवन में अदृश्य मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। जब इसकी ऊर्जा को सही रूप से समझा जाए, तो यह मोक्ष और आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त करता है।

🔚 केतु हमें सिखाता है – त्याग ही सबसे बड़ा बल है।

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