🔯 शनि ग्रह: प्रभाव, दोष और उपाय
शनि ग्रह को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। यह व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा लेता है। शुभ स्थिति में यह व्यक्ति को महान बनाता है, जबकि अशुभ स्थिति में बाधाएँ उत्पन्न करता है।
📌 शुभ प्रभाव:
- अनुशासनप्रिय और मेहनती बनाता है।
- दीर्घकालिक सफलता और स्थिरता देता है।
- व्यवस्था, न्याय और नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।
⚠️ अशुभ प्रभाव (शनि दोष):
- बार-बार विफलता और विलंब होता है।
- मानसिक तनाव, रोग, आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
- न्यायिक मामलों में उलझन हो सकती है।
🔧 उपाय:
- शनिवार को काली वस्तुएं दान करें।
- शनि मंदिर में तेल का दीपक जलाएं।
- गरीबों और अपाहिजों को भोजन और कपड़े दान करें।
- “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करें।
🕉️ छोटा शनि स्तोत्र:
नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
सदाऽभयंकरी त्वं हि भुक्ति मुक्ति प्रदायिनी॥
📜 विस्तृत शनि स्तोत्र (Shani Kavach):
ॐ श्री शनैश्चर कवचम् ॥
श्री गणेशाय नमः ।
अस्य श्री शनैश्चर कवच मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः,
अनुष्टुप छन्दः, श्री शनैश्चरो देवता ।
शनि प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ॥
ॐ शनैश्चरः पातु मे मूर्ध्नि, चक्षुषी च दिवाकरः ।
श्रुती पातु च मे सूर्यः, नासिके च तमोपहः ॥
मुखं पातु यमसूनुः, कण्ठं मे ग्रहनायकः ।
भुजौ च पातु मे पङ्गुः, हस्तौ मन्दगति सदा ॥
हृदयं पातु नित्यं च जठरं पातु चाम्बरः ।
नाभिं मे पातु नीलाञ्जनः, कटीं मे कालभैरवः ॥
ऊरू पातु च चायातनयः, जानुनी पातु सूर्यजः ।
जङ्घे मे ग्रहराजश्च, पादौ पातु दिनेश्वरः ॥
सर्वाण्यङ्गानि मे पातु शनैश्चरः सदा प्रभुः ।
इत्येतत् कवचं दिव्यं सर्वरोगनिवारणम् ॥
सर्वसम्पत्करं चैव सर्वदुःखनिवारणम् ।
यः पठेत् प्रातरुत्थाय स भुक्त्वा परमां गतिम् ॥
इति श्री ब्रह्माण्डपुराणे शनैश्चरकवचं सम्पूर्णम् ॥
नोट: शनि के दोषों से बचने के लिए श्रद्धा और सेवा का मार्ग अपनाना आवश्यक है।
🔚 शनि ग्रह सिखाता है – कर्म, संयम और सच्चाई का मूल्य।
