सूर्य ग्रह: स्तोत्र, शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय | Surya Graha Stotram, Effects & Remedies

Sanaatan Gyaan
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☀️ सूर्य ग्रह: स्तोत्र, शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय | Surya Graha Stotram, Effects & Remedies

हिंदू ज्योतिष में सूर्य ग्रह आत्मा, शक्ति, प्रतिष्ठा, और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। यदि कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति में नेतृत्व, साहस, और आत्मविश्वास की प्रचुरता होती है। लेकिन यदि यह अशुभ हो तो अहंकार, क्रोध और स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

सूर्य ग्रह स्तोत्र, शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय  Surya Graha Stotram, Effects & Remedies


📿 सूर्य ग्रह का स्तोत्र (Surya Graha Stotram):

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥

भावार्थ: जो जपा पुष्प के समान लाल हैं, महा तेजस्वी हैं, अंधकार के शत्रु हैं और समस्त पापों को नाश करने वाले हैं – ऐसे दिवाकर सूर्य को मैं नमस्कार करता हूँ।

📿 आदित्य हृदय स्तोत्र – Aditya Hridaya Stotra (पूरा पाठ)

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥ 1॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपगम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवान् ऋषिः॥ 2॥

राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्।
येन सर्वानरीन्वत्स समरे विजयिष्यसि॥ 3॥

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपेन्मार्गे निश्‍चयं विजयी भवेत्॥ 4॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्।
चिन्ताशोकप्रशमनं आयुर्वृद्धिकरं परम्॥ 5॥

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्।
पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥ 6॥

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः।
एष देवासुरगणान्लोकान्पाति गभस्तिभिः॥ 7॥

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः।
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः॥ 8॥

पितरो वसवः साध्या ह्यश्विनौ मरुतो मनुः।
वायुर्वह्निः प्रजाः प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः॥ 9॥

आदित्यः सविता सूर्यो रश्मिमान् भास्करो रविः।
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शङ्खशिशिरनाशनः॥ 10॥

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवङ्गमः॥ 11॥

आतपी मण्डली मृत्युः पिङ्गलः सर्वतापनः।
कविर्विश्वो महातेजा रक्तः सर्वभवोद्भवः॥ 12॥

नक्षत्रग्रह ताराणां अधिपो विश्वभावनः।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते॥ 13॥

नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥ 14॥

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः।
नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः॥ 15॥

नमः ऊग्राय वीराय सारङ्गाय नमो नमः।
नमः पद्मप्रबोधाय मार्तण्डाय नमो नमः॥ 16॥

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूर्यायादित्यवर्चसे।
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः॥ 17॥

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः॥ 18॥

तप्तचामीकराभाय वह्नये विश्वकर्मणे।
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे॥ 19॥

नाशयत्येष वै भूतं तदेव सृजति प्रभुः।
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः॥ 20॥

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः।
एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्॥ 21॥

वेदाश्च क्रतवश्चैव क्रतूनां फलमेव च।
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्व एष रविः प्रभुः॥ 22॥

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च।
कीर्तयन् पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव॥ 23॥

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम्।
एतत् त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि॥ 24॥

अस्मिन्क्षणे महाबाहो रावणं त्वं वधिष्यसि।
एवमुक्त्वा तदाऽगस्त्यो जगाम च यथागतम्॥ 25॥

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत् तदा।
धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान्॥ 26॥

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान्।
त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्॥ 27॥

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा युद्धाय समुपागमत्।
सर्वयत्नेन महता वधे तस्य धृतोऽभवत्॥ 28॥

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना परमं प्रमुदितः।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति॥ 29॥
सूर्य ग्रह का विस्तृत स्तोत्र (Aditya Hridaya Stotra) जोड़ रहा हूँ – 
जोकि सूर्य देव की उपासना में अत्यंत प्रभावी, शक्तिशाली और प्रसिद्ध है। 
यह श्रीराम द्वारा रावण से युद्ध से पूर्व महर्षि अगस्त्य के 
उपदेश से पाठ किया गया था।

🌞 सूर्य के शुभ प्रभाव:

  • उच्च आत्मबल और नेतृत्व क्षमता
  • राजकीय सम्मान और उच्च पद प्राप्ति
  • शारीरिक बल और अच्छी सेहत
  • प्रकाश, प्रसिद्धि और आत्मविश्वास में वृद्धि

🌑 सूर्य के अशुभ प्रभाव:

  • अहंकार और क्रोध की अधिकता
  • नेत्र और हृदय संबंधी रोग
  • पिता से मतभेद
  • अधीनता और आत्मबल की कमी

🛡️ सूर्य ग्रह के उपाय (Remedies):

  • रविवार के दिन सूर्य स्तोत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें
  • प्रातःकाल उगते सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें
  • गुड़, गेहूं और लाल वस्त्र का दान करें
  • ताम्र (Copper) की अंगूठी धारण करें (ज्योतिषाचार्य की सलाह से)
  • पिता और गुरु का सम्मान करें

📌 निष्कर्ष:

सूर्य ग्रह आत्मा और शक्ति का कारक है। इसके अनुकूल प्रभाव जीवन में प्रगति, प्रतिष्ठा और आत्मबल बढ़ाते हैं, जबकि प्रतिकूल स्थिति में स्वास्थ्य और सम्मान की हानि हो सकती है। सूर्य को संतुलित करने के लिए नियमित स्तोत्र पाठ और धार्मिक उपाय अत्यंत लाभकारी होते हैं।

क्या आपने कभी सूर्य अर्घ्य दिया है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें।

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