कुंजिकास्तोत्र विधान Kunjika Stotra Bidhan Hindi Lyrics

Sanaatan Gyaan
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 *कुंजिकास्तोत्र विधान*



" या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ "

धर्मग्रंथोमे दुर्गा शप्तशती सबसे दिव्य , रहस्यमय , शक्तिशाली स्तोत्र गान है । जगत जननी महामाया के तीनों स्वरूपो का बीजमंत्रों के साथ अनुष्ठान है । ब्रह्मांड का पुर्ण रहस्य भी है तो उर्जाका मूल स्तोत्र भी है । इस प्रचंड ऊर्जाशक्ति को धारण करना है तो उनके नियम आचार भी अत्यंत आवश्यक है ये तो सहज है । किसी पवित्र साधक से नियमानुसार दीक्षा लेकर शास्त्राज्ञा अनुसार अर्गला , किलक , बिगेरा नियम के साथ तिथि अनुसार पाठ किये जाते है । शप्तशती ग्रंथ स्वयं ही महामाया का विग्रह है । इसलिए उनका पाठ करने से पहले उनकी पूजा अर्चना भी आवश्यक है ।

आजके समयमे हर एक साधक केलिए सम्भव नही है , इसलिए शप्तशती उपासना के सार समान कुंजिका स्तोत्र है । योग्य सद्गुरु से आज्ञा लेकर सरल सहज कुंजिका स्तोत्र पाठ ओर मंत्रजाप से महामाया की प्रसन्नता प्राप्त कर सकते है । नित्य कुंजिका स्तोत्रपाठ करने से कठोर कर्मफल का भी नाश हो जाता है और जीवनकी हरकोई बाधा समस्या का निराकरण हो जाता है ।

कुंजिकास्तोत्र विधान :-

गुरु , गणपति , दुर्गा माता का ध्यान पूजन करे ।

विनियोग :-ॐ अस्य श्री सिद्ध कुंजिका स्तोत्र मन्त्रस्य सदा शिव ऋषि : अनुष्टुप छन्द : श्री त्रिगुणात्मिका देवता ॐ ऐं बीजं ॐ ह्रीं शक्ति : ॐ क्लीं कीलकं मम् सर्व अभीष्ट सिद्धयर्थे पाठे जपे च विनियोगः

अब बीज मंत्र का 51 बार उच्चारण करें:-मन्त्र:-

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चे ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चे ज्वल हं सं लं क्षंं फट् स्वाहा।।

अब पाठ करे :-

कुंजिकास्तोत्र महात्यम:-

श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डिजाप: शुभो भवेत् ।।

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ।।

कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ।।

गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।।
पाठमात्रेण संसिद्धयेत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम।।

स्तोत्र :-

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि ।
नम: कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ।।1।।

नमस्ते शुम्भहन्त्रयै च निशुम्भासुरघातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे।।2।।

ऎंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोsस्तु ते।।3।।

चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि।।4।।

धां धीं धूं धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु।।5।

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नम:।।6।।

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऎं वीं हं क्षं ।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा।।7।।

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धि कुरुष्व मे।।8।।

इदं तु कुंजिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति।।

यस्तु कुंजिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा।।

इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुंजिकास्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

पाठ के बाद महादेव का मंत्र :-

ॐ ह्रीं नमः शिवाये

एक माला जाप करे ।

पूजा , स्तोत्र , मंत्र जप के अन्तमे महादेव की आरती करें और पूजा , जाप , स्तोत्रपाठ का फल महादेव को अर्पण करें ये अत्यंत जरूरी सूचना है ।

आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र:!
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